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वो मेरे साथ नहीं तो क्या हुआ
   मोहब्बत आज भी हम उनसे उतनी किया करते है
      इश्क का जुनून कुछ इस कदर था हमारे सर पे
         भूल गए थे कि दिन रात भी हुआ करते है
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 मोहब्बत का दर्द कुछ इस कदर छुपाए बैठे हैं
    हम मिलेंगे किसी न किसी मोड़ पर
      बस यही आस लगे बैठे है मगर क्या करें
       वो तो किसी ओर के साथ घर बसाए बैठे है
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के दुश्मनी सी हो गई है इस ज़माने से
  तेरे पास आ जाऊ क्या
    अरे ठुकरा दिया हे इस ज़माने ने मुझे तेरा समझ कर
      अब तो अपना लो ना
       अगर अभी भी इम्तहान लेना हे तुम्हे मेरा इश्क में
         तो खुद को तेरे लिए जलाऊ क्या
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